जयपुर न्यूज डेस्क: राजस्थान में ऊंटों की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। ताजा मामला जैसलमेर जिले के लाठी इलाके से सामने आया है, जहां रविवार देर रात श्री भादरिया–लाठी रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पार कर रहे ऊंटों के झुंड को ट्रेन ने टक्कर मार दी। इस हादसे में छह ऊंटों की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि मृत ऊंटों के शव दूर-दूर तक बिखर गए। घटना का दृश्य बेहद दर्दनाक बताया जा रहा है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में गहरा दुख और नाराज़गी है।
जानकारी के अनुसार यह हादसा रविवार देर रात या सोमवार तड़के हुआ, जब लीलन एक्सप्रेस वहां से गुजर रही थी। उसी समय ऊंटों का एक झुंड रेलवे लाइन पार कर रहा था। तेज रफ्तार ट्रेन के अचानक पहुंचने से ऊंटों को संभलने का मौका नहीं मिला और छह ऊंट ट्रेन की चपेट में आ गए। इनमें से दो ऊंट ट्रेन के इंजन में फंस गए, जिन्हें निकालने में काफी मेहनत करनी पड़ी।
ऊंटों के इंजन में फंस जाने के कारण ट्रेन को करीब 20 से 30 मिनट तक ट्रैक पर ही रोकना पड़ा। बताया गया कि यह ट्रेन जैसलमेर से पोखरण की ओर जा रही थी। काफी प्रयास के बाद जब ऊंटों को इंजन से हटाया गया, तब जाकर ट्रेन को आगे रवाना किया गया। इस दौरान ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को भी कुछ समय तक इंतजार करना पड़ा।
सोमवार सुबह लाठी पुलिस थाने की टीम, रेलवे कर्मचारी जमादार रेवतराम चौधरी, वन्यजीव प्रेमी मुकेश भील और स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर मृत ऊंटों को रेलवे ट्रैक से हटाया। इस घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और ऊंट पालक भी मौके पर पहुंच गए।
लाठी और आसपास के इलाकों में पशुपालन लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है। खेती के साथ-साथ यहां बड़ी संख्या में लोग ऊंट और अन्य पशु पालते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग 11 के आसपास कई गांव बसे हुए हैं और रेलवे लाइन भी इन्हीं क्षेत्रों से होकर गुजरती है। खुले इलाके होने के कारण पशु अक्सर चरते-चरते रेलवे ट्रैक तक पहुंच जाते हैं, जिससे इस तरह के हादसे हो जाते हैं।
लाठी के पशुप्रेमी रणवीर सिंह ने बताया कि इस रूट पर पहले भी कई बार जानवर ट्रेन की चपेट में आ चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों ने मृत ऊंटों का पोस्टमार्टम कराने और प्रभावित पशुपालकों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही रेलवे ट्रैक के संवेदनशील हिस्सों पर फेंसिंग लगाने या ट्रेनों की गति नियंत्रित करने जैसे उपाय करने की भी मांग उठाई है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकें।