जयपुर न्यूज डेस्क: राजधानी जयपुर में एक बेहद चौंकाने वाला सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है, जहाँ लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ा एक पाकिस्तानी आतंकी लंबे समय तक सुरक्षित पनाहगाह बनाकर रहा। उमर हारिस, जिसे खुफिया एजेंसियां ‘खरगोश’ के नाम से जानती हैं, ने अपनी पहचान बदलकर जयपुर को अपना ठिकाना बनाया। यहाँ करीब दो साल तक सक्रिय रहने के बाद, वह एक फर्जी पासपोर्ट के जरिए भारत से बाहर भागने में भी कामयाब हो गया, जिसने पूरे खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच से पता चला है कि उमर हारिस का आतंकी नेटवर्क काफी गहरा है। वर्ष 2012 में पाकिस्तान से घुसपैठ कर जम्मू-कश्मीर में दाखिल हुआ यह आतंकी, हरियाणा के रास्ते जयपुर पहुंचा था। वह हाफिज सईद और अबू हुरैरा जैसे खूंखार आतंकियों का करीबी माना जाता है। जयपुर के जयसिंहपुरा खोर इलाके में 2023 से 2025 के बीच उसके प्रवास का उद्देश्य केवल छिपना नहीं था, बल्कि वह सुनियोजित ढंग से शहर की रेकी कर रहा था और संवेदनशील स्थानों की टोह ले रहा था।
इस आतंकी ने अपनी पहचान छुपाने के लिए जालसाजी का सहारा लिया। उसने जयपुर के आमेर स्थित राशिद विहार कॉलोनी के पते पर खुद को 'सज्जाद अहमद' के रूप में स्थापित किया। फर्जी किरायानामा, शादी के दस्तावेजों और अन्य सरकारी पहचान पत्रों के आधार पर न केवल उसने मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाया, बल्कि इन अवैध दस्तावेजों की मदद से पासपोर्ट भी हासिल कर लिया। इसी फर्जी पहचान के दम पर वह इंडोनेशिया के रास्ते खाड़ी देशों में पलायन कर गया।
अब राजस्थान पुलिस और एटीएस (ATS) इस मामले में युद्धस्तर पर कार्रवाई कर रही है। एजेंसियां उन स्थानीय लोगों और सहयोगियों की पहचान कर रही हैं, जिन्होंने उसे फर्जी दस्तावेज बनवाने और शहर में नेटवर्क खड़ा करने में मदद की। इस सुरक्षा चूक ने स्थानीय प्रशासन और खुफिया तंत्र के दावों की पोल खोल दी है, जिससे अब यह स्पष्ट हो गया है कि ‘खरगोश’ जैसे आतंकियों के लिए स्थानीय तंत्र का दुरुपयोग करना आसान हो गया है। पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है ताकि उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को पकड़ा जा सके।