जयपुर न्यूज डेस्क: भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को राजस्थान के अपने पहले आधिकारिक दौरे की शुरुआत टोंक से की। टोंक को कांग्रेस के दिग्गज नेता और राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, ऐसे में भाजपा अध्यक्ष का यहाँ से अपने प्रवास का आगाज करना एक सोची-समझी रणनीतिक चाल मानी जा रही है। टोंक में नबीन ने भाजपा के जिला कार्यालय का उद्घाटन किया और वर्चुअली प्रदेश के अन्य सात जिलों (बूंदी, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, चूरू, पाली और बाड़मेर) के कार्यालयों का भी लोकार्पण किया।
पूर्वी राजस्थान के इस दौरे को भाजपा की "फ्रंट फुट" राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है। मुस्लिम और गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण टोंक हमेशा से कांग्रेस, विशेषकर सचिन पायलट के लिए सुरक्षित सीट रही है। भाजपा का उद्देश्य इस क्षेत्र में अपने कैडर को सक्रिय करना और उन जिलों में पैठ बनाना है जहाँ पहले पार्टी को संघर्ष करना पड़ा था। 2023 के विधानसभा चुनावों के आंकड़ों से भी भाजपा उत्साहित है, जहाँ उसने इस क्षेत्र के पांच प्रमुख जिलों की 13 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस केवल 8 सीटों पर सिमट गई थी।
कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल बढ़ गई जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने एक प्रेस वार्ता में सचिन पायलट को लेकर बड़ा बयान दिया। राठौड़ ने पायलट की क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे एक सक्षम नेता हैं लेकिन "गलत पार्टी" में हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि पायलट राष्ट्रवाद के हित में भाजपा में शामिल होना चाहें, तो उनका स्वागत किया जाएगा। राठौड़ के इस बयान को कांग्रेस के भीतर चल रही अंतर्कलह और 2020 के पायलट विद्रोह की यादों को ताजा करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
नितिन नबीन के जयपुर पहुंचने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, दोनों उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की उपस्थिति ने भी सबका ध्यान खींचा। जानकारों का मानना है कि भाजपा का यह टोंक दौरा केवल संगठनात्मक कवायद नहीं है, बल्कि यह राजस्थान भाजपा के भीतर के विभिन्न गुटों को एकजुट करने और कांग्रेस के किलों में सेंध लगाने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है।