जयपुर न्यूज डेस्क: जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने नगर निगम में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो वेटरनरी डॉक्टर और एक संविदाकर्मी को 4 लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। यह रिश्वत 75 लाख रुपए के बिल पास करने और तकनीकी गणना आगे बढ़ाने के एवज में मांगी गई थी। कार्रवाई तब हुई जब एसीबी ने संविदाकर्मी जितेंद्र सिंह शेखावत को ट्रैप कर रंगे हाथों पकड़ लिया। पूछताछ में दोनों डॉक्टरों—डॉ. योगेश शर्मा और डॉ. राकेश कलोरिया—की भूमिका सामने आई और उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया।
एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता के अनुसार, परिवादी को आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का टेंडर मिला था और उसने नवंबर-दिसंबर 2025 के बिल नगर निगम में प्रस्तुत किए। अधिकारियों ने तकनीकी गणना के नाम पर फाइल रोक दी और 12 से 15 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की। जांच में पता चला कि दोनों डॉक्टर सीधे रकम लेने से बच रहे थे और अपने संविदा कर्मचारी के जरिए घूस की वसूली करवा रहे थे।
सोमवार को तयशुदा 4 लाख रुपए संविदाकर्मी को सौंपते ही एसीबी ने उसे पकड़ लिया। प्रारंभिक पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि रकम दोनों डॉक्टरों के लिए थी। इसके बाद डॉ. योगेश शर्मा और डॉ. राकेश कलोरिया को हिरासत में लेकर साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार किया गया। एसीबी सूत्रों ने बताया कि दस्तावेजी साक्ष्य, बैंक लेन-देन और अन्य संबंधित कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी।
यह मामला केवल रिश्वत का नहीं, बल्कि नगर निगम की सार्वजनिक स्वास्थ्य और पशु नियंत्रण व्यवस्था से जुड़ा है। एसीबी ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस अपनाया जाएगा। तीनों आरोपी फिलहाल गिरफ्त में हैं और रिमांड के दौरान पूरे घूस नेटवर्क और साजिश का खुलासा किया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद नगर निगम महकमे में हड़कंप मच गया है और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।