जयपुर न्यूज डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक वर्ष तक सोना न खरीदने की अपील के बाद जयपुर के स्वर्ण आभूषण बाजार में चिंता की लहर दौड़ गई है। यहां के व्यापारियों और उद्योग विशेषज्ञों को डर है कि मांग में कमी आने से न केवल व्यापार प्रभावित होगा, बल्कि लाखों कारीगरों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।
उद्योग की मुख्य चिंताएं:
रोजगार पर संकट: जयपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव अजय काला के अनुसार, जयपुर रत्न और आभूषणों का एक प्रमुख केंद्र है। इस क्षेत्र की मांग में गिरावट से आभूषण कारखानों और शोरूमों में काम करने वाले लाखों कारीगरों, डिजाइनरों और पॉलिश करने वालों का रोजगार छिन सकता है।
आर्थिक प्रभाव: राजस्थान में सालाना लगभग 42-45 टन सोने की खपत होती है। मांग में कमी आने से निर्यात और विदेशी मुद्रा की कमाई पर भी बुरा असर पड़ेगा।
बढ़ती लागत: रुपये की गिरावट, उच्च आयात शुल्क और जीएसटी (GST) के कारण सोने की कीमतें पहले ही आसमान छू रही हैं। व्यापारियों का मानना है कि मांग में और कमी पूरे व्यापार चक्र को बिगाड़ देगी।
व्यापारियों के सुझाव और चेतावनी:
रिसाइकल्ड गोल्ड पर राहत: जयपुर सराफा ट्रेडर्स कमेटी के अध्यक्ष कैलाश मित्तल ने सुझाव दिया कि यदि सरकार उपभोक्ताओं द्वारा बाजार में लाए गए पुराने (रिसाइकल्ड) सोने पर टैक्स राहत दे, तो आयात की निर्भरता कम हो सकती है।
सांस्कृतिक महत्व: ज्वेलर्स एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष राजू मंगोड़ीवाला ने कहा कि भारत में बेटियों को शादी में सोना देना एक पुरानी परंपरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि सोने के आयात पर कड़े प्रतिबंधों से तस्करी (Smuggling) की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है।
व्यापारियों ने सरकार से अपील की है कि वह राष्ट्रीय आर्थिक हितों और उद्योग की चिंताओं के बीच संतुलन बनाए और निर्यात-उन्मुख विनिर्माण को नीतिगत सहायता प्रदान करे।