जयपुर न्यूज डेस्क: राजस्थान हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार से साइबर अपराध रोकने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी और बचे हुए निर्देशों को पूरा करने की समय-सीमा भी पूछी। कोर्ट ने 15 दिन में एक व्यापक हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें प्रत्येक दिशा-निर्देश के पालन का विवरण शामिल हो। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को तय की गई है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस कमिश्नर को बुलाने के बावजूद साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर अभी तक स्थापित नहीं किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक कठिनाइयों के बारे में जानकारी देने पर उचित न्यायिक आदेश दिए जा सकते हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) भास्कर ए सावंत ने बताया कि प्रस्तावित सेंटर के लिए लगभग 10,000 वर्ग फुट की जगह की जरूरत है और मुख्यमंत्री ने इसे स्थापित करने का आश्वासन दिया है।
साइबर विंग में कर्मचारियों की कमी पर ADG VK सिंह ने बताया कि RPSC परीक्षा के माध्यम से उपयुक्त उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हो पाए। वहीं, राज्य ने कोर्ट को यह भी बताया कि प्रत्येक जिले में और हाईकोर्ट के जयपुर व जोधपुर बेंच में विशेष साइबर क्राइम सरकारी अभियोजक नियुक्त किए जाएंगे, जिनकी नियुक्ति 15 दिनों के भीतर पूरी होने की उम्मीद है।
राज्य ने कोर्ट को डिजिटल फोरेंसिक उपकरणों की खरीद, साइबर अपराधों में उपयोग हो रही SIM कार्ड और बैंक खातों की पहचान और ब्लॉकिंग जैसे कदमों की जानकारी भी दी। कोर्ट ने कहा कि अब तक किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए भी, ठोस प्रगति नहीं दिख रही है और इसलिए सरकार को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगा।