जयपुर न्यूज डेस्क: जयपुर में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर अब होटल और ढाबों के कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस की सप्लाई प्रभावित होने के कारण कई छोटे ढाबे और रेस्टोरेंट अब अपने किचन चलाने के लिए फिर से कोयले और लकड़ी की पारंपरिक भट्टियों का सहारा लेने लगे हैं। खासतौर पर शहर के पुराने परकोटे वाले इलाकों में यह बदलाव ज्यादा देखने को मिल रहा है।
कोयला व्यापारियों के अनुसार पिछले तीन-चार दिनों में इसकी मांग अचानक बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि पहले ढाबों में कोयले का इस्तेमाल आम था, लेकिन समय के साथ अधिकांश होटल और रेस्टोरेंट एलपीजी पर शिफ्ट हो गए थे। अब गैस सिलेंडर की कमी के कारण कई छोटे ढाबे फिर से कोयले और लकड़ी से खाना बनाने को मजबूर हो गए हैं।
व्यापारियों का दावा है कि हाल के दिनों में कोयले की मांग पांच से छह गुना तक बढ़ गई है। हालांकि बाजार में फिलहाल कोयला उपलब्ध है, लेकिन मांग बढ़ने के कारण इसके दाम में हल्की बढ़ोतरी भी देखने को मिल रही है। जिन ढाबों या छोटे होटलों की रसोई खुली या अर्ध-खुली है, वे अस्थायी रूप से कोयले या लकड़ी की भट्टी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
वहीं होटल और ढाबा संचालकों का कहना है कि गैस सिलेंडर आसानी से नहीं मिल रहे, इसलिए उन्हें मजबूरी में कोयले और लकड़ी से खाना बनाना पड़ रहा है। इससे धुएं और राख की समस्या भी बढ़ रही है। इस बीच ईंधन संकट का असर शहर के सीएनजी स्टेशनों पर भी दिख रहा है, जहां ऑटो रिक्शा चालकों को गैस भरवाने के लिए लंबी कतारों में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।