जयपुर न्यूज डेस्क: जयपुर भीषण गर्मी की चपेट में है। शहर के 13% वार्ड हाई और एक्सट्रीम हीट जोन में पहुंच गए हैं, जहां रात में भी लोगों को राहत नहीं मिल रही। वहीं 48% वार्ड मध्यम स्तर के हीट स्ट्रेस से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले एक सप्ताह में जयपुर का औसत तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा, जो दुबई और अबू धाबी जैसे रेगिस्तानी शहरों से भी अधिक है।
जयपुर के मानसरोवर और झोटवाड़ा जैसे इलाकों में तापमान सामान्य से 12 डिग्री तक ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। यह खुलासा सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट की इंडिया एन्वायरमेंट रिपोर्ट 2026 में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक शहर के सभी वार्ड किसी न किसी स्तर पर थर्मल जोखिम की जद में हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जयपुर कभी अपनी जलवायु-अनुकूल वास्तुकला के लिए जाना जाता था। पुराने शहर की हवेलियां, चौक, आंगन, मोटी दीवारें, छज्जे, तालाब और बावड़ियां प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम की तरह काम करती थीं। लेकिन पिछले दो दशकों में तेजी से कंक्रीट निर्माण, हरियाली में कमी, खुले क्षेत्रों का खत्म होना और जल स्रोतों के सूखने से शहर “अर्बन हीट आइलैंड” में बदलने लगा है।
इसका सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों पर पड़ रहा है, जहां छोटे बंद घरों, टिन शेड और खराब वेंटिलेशन के कारण घरों के अंदर तापमान बाहर से भी ज्यादा हो जाता है। मजदूर परिवारों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 2037 तक जयपुर में कूलिंग की मांग तीन गुना तक बढ़ सकती है। इससे बिजली की खपत, पावर कट और बिलों का दबाव बढ़ेगा। विशेषज्ञों ने शहर में हरियाली बढ़ाने, पार्कों और जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने, कूल रूफ, बेहतर वेंटिलेशन, पौधारोपण, सोलर एनर्जी और डिस्ट्रिक्ट कूलिंग जैसी तकनीकों को अपनाने की सलाह दी है।
डॉक्टरों के मुताबिक तापमान 40°C पार होने पर हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। इससे शरीर का तापमान नियंत्रण बिगड़ सकता है और ब्रेन, हार्ट व किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। बच्चे, बुजुर्ग और धूप में काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।